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सूक्ति संग्रह २६:१८-१९

सूक्ति संग्रह २६:१८-१९

१८
उस उन्मादी सा जो मशाल उछालता है या मनुष्य जो घातक तीर फेंकता है
१९
वैसे ही वह भी होता है जो अपने पड़ोसी की छलता है और कहता है, “मैं तो बस ऐसे ही मजाक कर रहा था!”
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