मार्कास ७:२०-२२
२०
“जो मनुष्य में से बाहर आता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है.
२१
मनुष्य के भीतर से—मनुष्य के हृदय ही से—बुरे विचार बाहर आते हैं, जो उसे चोरी, हत्या, व्यभिचार,
२२
लोभ, दुराचारिता, छल-कपट, कामुकता, जलन, निंदा, अहंकार तथा मूर्खता की ओर लगा देते हैं.