Skip to content
विलापगीत ३:३१-३३

विलापगीत ३:३१-३३

३१
प्रभु का परित्याग चिरस्थायी नहीं हुआ करता.
३२
यद्यपि वह पीड़ा के कारण तो हो जाते हैं, किंतु करुणा का सागर भी तो वही हैं, क्योंकि अथाह होता है उनका करुणा-प्रेम.
३३
पीड़ा देना उनका सुख नहीं होता न ही मनुष्यों को यातना देना उनका आनंद होता है.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options