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अय्योब २८:२०-२२

अय्योब २८:२०-२२

२०
तब, कहां है विवेक का उद्गम? कहां है समझ का निवास?
२१
तब यह स्पष्ट है कि यह मनुष्यों की दृष्टि से छिपी है, हां, पक्षियों की दृष्टि से भी इसे नहीं देख पाते है.
२२
नाश एवं मृत्यु स्पष्ट कहते हैं “अपने कानों से तो हमने बस, इसका उल्लेख सुना है.”
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