Skip to content
निर्गमन २५:३१-४०

निर्गमन २५:३१-४०

३१
“फिर शुद्ध सोने का एक दीपस्तंभ बनाना. उसके आधार तथा उसके डंडे को बनाना, और उसमें फूलों के समान प्याले बनाना. प्यालों के साथ कलियां और खिले हुए पुष्प हों. ये सभी चीज़ें सोना पीटकर एक ही इकाई में परस्पर जुड़ी हुई हो.
३२
दीये से छः डालियां निकलें, तीन एक तरफ और तीन दूसरी तरफ रखना.
३३
हर डाली में बादाम के फूल जैसी तीन कलियां और एक गांठ हों, और एक फूल दीये से बाहर निकली हुई, पूरी छः डालियों को इसी आकार से बनाना.
३४
दीये की डंडी में चार फूल बनाना, जिसमें बादाम के फूल के समान कलियां तथा पंखुड़ियां बनाना.
३५
दीये से निकली हुई छः डालियों में से दो-दो डालियों के नीचे एक-एक गांठ हों और दीये समेत एक ही टुकड़े से बने हो.
३६
कलियां, शाखाएं और दीप का स्तंभ शुद्ध सोने को पीटकर बने हो.
३७
“सात दीये बनाना और सातों दीयों को जलाए रखना ताकि वे रोशनी दे सकें.
३८
चिमटियां तथा इन्हें रखने के बर्तन भी सोने के हों.
३९
ये पूरा सामान लगभग पैंतीस किलो सोने से बना हो.
४०
सावधानी से इन सभी चीज़ों को बिलकुल वैसा ही बनाना जैसा तुम्हें पर्वत पर दिखाया गया था.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options