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इफ़ेसॉस २:१-३

पाप और आत्मिक मृत्यु में जीवन

इफ़ेसॉस २:१-३
तुम अपने अपराधों और पापों में मरे हुए थे,
जिनमें तुम पहले इस संसार के अनुसार और आकाशमंडल के अधिकारी, उस आत्मा के अनुसार जी रहे थे, जो आत्मा अब भी आज्ञा न माननेवालों में काम कर रहा है.
एक समय था जब हम भी इन्हीं में थे और अपनी वासनाओं में लीन रहते थे, शरीर और मन की अभिलाषाओं को पूरा करने में लगे हुए अन्यों के समान क्रोध की संतान थे
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