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व्यवस्था ३:२३-२७

व्यवस्था ३:२३-२७

२३
मैंने उस समय याहवेह से यह विनती की:
२४
“प्रभु याहवेह, आपने अपने सेवक पर अपनी महिमा और सामर्थ्य दिखाना शुरू किया है. क्योंकि स्वर्ग और पृथ्वी पर कौन है ऐसा देवता, जो आपके समान ऐसे काम और सामर्थ्य से भरे काम पूरे कर सके?
२५
प्रभु, मेरी विनती है, कृपा कर मुझे यरदन के पार जाकर उस श्रेष्ठ देश को सिर्फ देख लेने दीजिए, उस सुहावने पर्वतीय प्रदेश और लबानोन को.”
२६
मगर याहवेह तुम्हारे कारण मुझसे क्रोधित थे. उन्होंने मेरी इस विनती को अनसुनी की. उन्होंने कहा, “बहुत हो चुका, अब मुझसे इस विषय का वर्णन न करना.
२७
पिसगाह पर्वत शिखर पर चले जाओ, पश्चिम, उत्तर, पूर्व और दक्षिण दिशा की ओर दृष्टि कर उसको देख लो, क्योंकि यरदन के पार तो तुम जा ही न सकोगे.
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