1 कोरिंथ १२:२०-२२
२०
इसलिये वास्तविकता यह है कि अंग अनेक किंतु शरीर एक ही है.
२१
आंख हाथ से नहीं कह सकती, “मुझे तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं,” या हाथ-पैर से, “मुझे तुम्हारी ज़रूरत नहीं.”
२२
इसके विपरीत शरीर के वे अंग, जो दुर्बल मालूम होते हैं, बहुत ज़रूरी हैं.
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