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1 कोरिंथ १२:१५-२०

1 कोरिंथ १२:१५-२०

१५
यदि पैर कहे, “मैं हाथ नहीं इसलिये मैं शरीर का अंग नहीं.” तो क्या उसके ऐसा कहने से वह शरीर का अंग नहीं रह जाता?
१६
और यदि कान कहे, “मैं आंख नहीं इसलिये मैं शरीर का अंग नहीं.” तो क्या उसके ऐसा कहने से वह शरीर का अंग नहीं रह जाता?
१७
यदि सारा शरीर आंख ही होता तो सुनना कैसे होता? यदि सारा शरीर कान ही होता तो सूंघना कैसे होता?
१८
किंतु परमेश्वर ने अपनी अच्छी बुद्धि के अनुसार हर एक अंग को शरीर में नियुक्त किया है.
१९
यदि सभी अंग एक ही अंग होते तो शरीर कहां होता?
२०
इसलिये वास्तविकता यह है कि अंग अनेक किंतु शरीर एक ही है.
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