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1 कोरिंथ १२:१४-१६

1 कोरिंथ १२:१४-१६

१४
शरीर सिर्फ एक अंग नहीं परंतु अनेक अंग है.
१५
यदि पैर कहे, “मैं हाथ नहीं इसलिये मैं शरीर का अंग नहीं.” तो क्या उसके ऐसा कहने से वह शरीर का अंग नहीं रह जाता?
१६
और यदि कान कहे, “मैं आंख नहीं इसलिये मैं शरीर का अंग नहीं.” तो क्या उसके ऐसा कहने से वह शरीर का अंग नहीं रह जाता?
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