रोमियों ३:१०-१८
१०
पवित्र शास्त्र का लेख भी यही है: “कोई भी धर्मी नहीं—एक भी नहीं;
११
कोई भी नहीं, जिसमें सोचने की शक्ति है; कोई भी नहीं, जो परमेश्वर को खोजता है!
१२
सभी परमेश्वर से दूर हो गए, वे सब निकम्मे हो गए. कोई भी भलाई करनेवाला नहीं, एक भी नहीं.”
१३
“उनके गले खुली कब्र तथा उनकी जीभ छल-कपट का साधन हैं.” “उनके होंठों से घातक सांपों का विष छलकता है.”
१४
“उनके मुंह शाप तथा कड़वाहट से भरे हुए हैं.”
१५
“उनके पांव लहू बहाने के लिए फुर्तीले हैं;
१६
विनाश तथा क्लेश उनके मार्ग में बिछे हैं,
१७
शांति के मार्ग से वे हमेशा अनजान हैं.”
१८
“उसकी दृष्टि में परमेश्वर के प्रति कोई भय है ही नहीं.”
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