Skip to content
प्रकाशन १२:१५-१६

प्रकाशन १२:१५-१६

१५
इस पर उस सांप ने अपने मुंह से नदी के समान जल इस रीति से बहाया कि वह स्त्री उस बहाव में बह जाए.
१६
किंतु उस स्त्री की सहायता के लिए भूमि ने अपना मुंह खोलकर परों वाले सांप द्वारा बहाए पानी के बहाव को अपने में समा लिया.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options