Skip to content
स्तोत्र ९६:११-१२

स्तोत्र ९६:११-१२

११
स्वर्ग आनंदित हो और पृथ्वी मगन; समुद्र और उसमें मगन सब कुछ इसी हर्षोल्लास को प्रतिध्वनित करें.
१२
समस्त मैदान और उनमें चलते फिरते रहे सभी प्राणी उल्‍लसित हों; तब वन के समस्त वृक्ष आनंद में गुणगान करने लगेंगे.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options