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स्तोत्र ४५:१-२

स्तोत्र ४५:१-२

संगीत निर्देशक के लिये. “कुमुदिनी” धुन पर आधारित. कोराह के पुत्रों की रचना. एक मसकील. एक विवाह गीत. राजा के सम्मान में कविता पाठ करते हुए मेरे हृदय में मधुर भाव उमड़ रहा हैं; मेरी जीभ कुशल लेखक की लेखनी बन गई है.
आप ही पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ हैं, आपके होंठों में अनुग्रह भरा होता है, क्योंकि स्वयं परमेश्वर द्वारा आपको सदैव के लिए आशीषित किया गया है.
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