मुख्य सामग्री पर जाएँ
स्तोत्र ४१:१०-१२

ईश्वरीय उद्धार के लिए भरोसेमन्द विनती

स्तोत्र ४१:१०-१२
१०
किंतु याहवेह, आप मुझ पर कृपा करें; मुझमें पुनः बल-संचार करें कि मैं उनसे प्रतिशोध ले सकूं.
११
इसलिये कि मेरा शत्रु मुझे नाश न कर सका, मैं समझ गया हूं कि आप मुझसे अप्रसन्‍न नहीं हैं.
१२
मेरी सच्चाई के कारण मुझे स्थिर रखते हुए, सदा-सर्वदा के लिए अपनी उपस्थिति में मुझे बसा लीजिए.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Reading Width 45 chars

Options