Skip to content
स्तोत्र ३७:१६-१७

स्तोत्र ३७:१६-१७

१६
दुष्ट की विपुल संपत्ति की अपेक्षा धर्मी की सीमित राशि ही कहीं उत्तम है;
१७
क्योंकि दुष्ट की भुजाओं का तोड़ा जाना निश्चित है, किंतु याहवेह धर्मियों का बल हैं.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options