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स्तोत्र १४८:११-१३

स्तोत्र १४८:११-१३

११
पृथ्वी के राजा और राज्य के लोग, प्रधान और पृथ्वी के समस्त शासक,
१२
युवक और युवतियां, वृद्ध और बालक.
१३
सभी याहवेह की महिमा का गुणगान करें, क्योंकि मात्र उन्हीं की महिमा सर्वोच्च है; उनका ही तेज पृथ्वी और आकाश से महान है.
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