Skip to content
स्तोत्र १४७:१६-१७

स्तोत्र १४७:१६-१७

१६
वह हिमवृष्टि करते हैं, जो ऊन समान दिखता है; जब पाला पड़ता है, वह बिखरे हुए भस्म समान लगता है.
१७
जब वह ओले के छोटे-छोटे टुकड़े से वृष्टि करते हैं, तो किसमें उस शीत को सहने की क्षमता है?
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options