Skip to content
स्तोत्र १४७:१०-११

स्तोत्र १४७:१०-११

१०
घोड़े के बल में उन्हें कोई रुचि नहीं है, और न ही किसी मनुष्य के शक्तिशाली पैरों में.
११
याहवेह को प्रसन्‍न करते हैं वे, जिनमें उनके प्रति श्रद्धा है, जिन्होंने उनके करुणा-प्रेम को अपनी आशा का आधार बनाया है.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options