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स्तोत्र १३०:३-४

क्षमा आशा की नींव है

स्तोत्र १३०:३-४
३
याहवेह, यदि आप अपराधों का लेखा रखने लगें, तो प्रभु, कौन ठहर सकेगा?
४
किंतु आप क्षमा शील हैं, तब आप श्रद्धा के योग्य हैं.
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