Skip to content
स्तोत्र १३०:३-४

स्तोत्र १३०:३-४

याहवेह, यदि आप अपराधों का लेखा रखने लगें, तो प्रभु, कौन ठहर सकेगा?
किंतु आप क्षमा शील हैं, तब आप श्रद्धा के योग्य हैं.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options