Μετάβαση στο περιεχόμενο
स्तोत्र १०४:१३-१४

स्तोत्र १०४:१३-१४

१३
वही अपने आवास के ऊपरी कक्ष से पर्वतों की सिंचाई करते हैं; आप ही के द्वारा उपजाए फलों से पृथ्वी तृप्‍त है.
१४
वह पशुओं के लिए घास उत्पन्‍न करते हैं, तथा मनुष्य के श्रम के लिए वनस्पति, कि वह पृथ्वी से आहार प्राप्‍त कर सके:
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Reading Width 45 chars

Options