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स्तोत्र १०३:१७-१८

स्तोत्र १०३:१७-१८

१७
किंतु याहवेह का करुणा-प्रेम उनके श्रद्धालुओं पर अनादि से अनंत तक, तथा परमेश्वर की धार्मिकता उनकी संतान की संतान पर स्थिर बनी रहती है.
१८
जो उनकी वाचा का पालन करते तथा उनके आदेशों का पालन करना याद रखते हैं.
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