स्तोत्र १०३:१-५
१
दावीद की रचना मेरे प्राण, याहवेह का स्तवन करो; मेरी संपूर्ण आत्मा उनके पवित्र नाम का स्तवन करे.
२
मेरे प्राण, याहवेह का स्तवन करो, उनके किसी भी उपकार को न भूलो.
३
वह तेरे सब अपराध क्षमा करते तथा तेरे सब रोग को चंगा करते हैं.
४
वही तेरे जीवन को गड्ढे से छुड़ा लेते हैं तथा तुझे करुणा-प्रेम एवं मनोहरता से सुशोभित करते हैं.
५
वह तेरी अभिलाषाओं को मात्र उत्कृष्ट वस्तुओं से ही तृप्त करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप तेरी जवानी गरुड़-समान नई हो जाती है.
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