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सूक्ति संग्रह ६:२७-२९

सूक्ति संग्रह ६:२७-२९

२७
क्या यह संभव है कि कोई व्यक्ति अपनी छाती पर आग रखे और उसके वस्त्र न जलें?
२८
अथवा क्या कोई जलते कोयलों पर चले और उसके पैर न झुलसें?
२९
यही नियति है उस व्यक्ति की, जो पड़ोसी की पत्नी के साथ यौनाचार करता है; उसके साथ इस रूप से संबंधित हर एक व्यक्ति का दंड निश्चित है.
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