Skip to content
सूक्ति संग्रह ५:३-४

सूक्ति संग्रह ५:३-४

क्योंकि व्यभिचारिणी की बातों से मानो मधु टपकता है, उसका वार्तालाप तेल से भी अधिक चिकना होता है;
किंतु अंत में वह चिरायते सी कड़वी तथा दोधारी तलवार-सी तीखी-तीक्ष्ण होती है.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options