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सूक्ति संग्रह २४:१-२

सूक्ति संग्रह २४:१-२

दुष्टों से ईर्ष्या न करना, उनके साहचर्य की कामना भी न करना;
उनके मस्तिष्क में हिंसा की युक्ति तैयार होती रहती है, और उनके मुख से हानिकर शब्द ही निकलते हैं.
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