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सूक्ति संग्रह २०:७-८

सच्चाई, न्याय और राजत्व

सूक्ति संग्रह २०:७-८
७
धर्मी जन निष्कलंक जीवन जीता है; उसके बाद आनेवाली संतानें धन्य हैं.
८
न्याय-सिंहासन पर विराजमान राजा मात्र अपनी दृष्टि ही से बुराई को भांप लेता है.
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