Skip to content
सूक्ति संग्रह १६:२-३

सूक्ति संग्रह १६:२-३

मनुष्य की दृष्टि में उसका अपना समस्त चालचलन शुद्ध ही होता है, किंतु याहवेह ही उसकी अंतरात्मा को परखते हैं.
अपना समस्त उपक्रम याहवेह पर डाल दो, कि वह तुम्हारी योजनाओं को सफल कर सकें.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options