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मत्तियाह १४:२४-२७

मत्तियाह १४:२४-२७

२४
विपरीत दिशा में हवा तथा लहरों के थपेड़े खाकर नाव तट से बहुत दूर निकल चुकी थी.
२५
रात के अंतिम प्रहर में येशु जल सतह पर चलते हुए उनकी ओर आए.
२६
उन्हें जल सतह पर चलते देख शिष्य घबराकर कहने लगे, “दुष्टात्मा है यह!” और वे भयभीत हो चिल्लाने लगे.
२७
इस पर येशु ने उनसे कहा, “डरो मत. साहस रखो! मैं हूं!”
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