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मत्तियाह १४:२४-२५

मत्तियाह १४:२४-२५

२४
विपरीत दिशा में हवा तथा लहरों के थपेड़े खाकर नाव तट से बहुत दूर निकल चुकी थी.
२५
रात के अंतिम प्रहर में येशु जल सतह पर चलते हुए उनकी ओर आए.
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