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इब्री १३:१-२

इब्री १३:१-२

१
भाईचारे का प्रेम लगातार बना रहे.
२
अपरिचितों का अतिथि-सत्कार करना न भूलो. ऐसा करने के द्वारा कुछ ने अनजाने ही स्वर्गदूतों का अतिथि-सत्कार किया था.
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