Skip to content
इब्री १०:२६-२७

इब्री १०:२६-२७

२६
यदि सत्य ज्ञान की प्राप्‍ति के बाद भी हम जानबूझकर पाप करते जाएं तो पाप के लिए कोई भी बलि बाकी नहीं रह जाती;
२७
सिवाय न्याय-दंड की भयावह प्रतीक्षा तथा क्रोध की आग के, जो सभी विरोधियों को भस्म कर देगी.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 90 chars

Options