2 कोरिंथ २:६-८
६
काफ़ी है ऐसे व्यक्ति के लिए बहुमत द्वारा तय किया गया दंड.
७
इसकी बजाय भला यह होगा कि तुम उसे क्षमा कर धीरज दो. कहीं ऐसा न हो कि कष्ट की अधिकाई उसे निराशा में डुबो दे.
८
इसलिये तुमसे मेरी विनती है कि तुम दोबारा उसके प्रति अपने प्रेम की पुष्टि करो.