Skip to content
2 इतिहास ६:४०-४२

2 इतिहास ६:४०-४२

४०
“अब, मेरे परमेश्वर, मेरी विनती है कि इस स्थान में की गई प्रार्थना के प्रति आपकी आंखें खुली और आपके कान सचेत बने रहें.
४१
“इसलिये अब, याहवेह परमेश्वर, खुद आप और आपकी शक्ति संदूक,
४२
याहवेह परमेश्वर अपने अभिषिक्त की प्रार्थना अनसुनी न कीजिए.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options