1 कोरिंथ १४:३७-४०
३७
यदि कोई स्वयं को भविष्यवक्ता या आत्मिक व्यक्ति समझता है तो वह यह जान ले कि मैं तुम्हें जो कुछ लिख रहा हूं, वे सब प्रभु की आज्ञाएं हैं.
३८
यदि कोई इस सच्चाई को नहीं मानता है, वह स्वयं भी माना न जाएगा.
३९
इसलिये, प्रिय भाई बहनो, भविष्यवाणी करने की क्षमता की इच्छा करते रहो, अन्य भाषा बोलने से मना न करो.
४०
तुम जो कुछ करो, वह शालीनता तथा व्यवस्थित रूप में किया जाए.
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