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1 कोरिंथ १३:४-६

1 कोरिंथ १३:४-६

४
प्रेम धीरजवंत है, प्रेम कृपालु है. प्रेम जलन नहीं करता, अपनी बड़ाई नहीं करता, घमंड नहीं करता,
५
अशोभनीय नहीं, स्वार्थी नहीं, झुंझलाता भी नहीं और क्रोधी भी नहीं है.
६
उसका आनंद दुराचार में नहीं, सच्चाई में है.
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